> गले में जिसके नाग लिरिक्स - Gale Me Jiske Naag - Bholenth Bhajan Lyrics
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गले में जिसके नाग लिरिक्स - Gale Me Jiske Naag - Bholenth Bhajan Lyrics

गले में जिसके नाग लिरिक्स - Gale Me Jiske Naag - Bholenth Bhajan Lyrics

गले में जिसके नाग लिरिक्स - Gale Me Jiske Naag - Bholenth Bhajan Lyrics
Gale Me Jiske Naag


गले में जिसके नाग लिरिक्स

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान्
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

गले में जिसके नाग
सर पे गंगे का निवास ।
जो नाथों का है नाथ भोलेनाथ जी
करता पापों का विनाश ॥

कैलाश पे निवास
डमरू वाला वो सन्यास भोलेनाथ जी ।
जो फिरता मारा मारा
उसको देता वो सहारा ॥

तीनो लोक का वो स्वामी भोलेनाथ जी
रख दे सर पे जिसके हाथ ।
दुनिया चलती उसके साथ
ऐसा खेल है खिलाता मेरा नाथ जी ॥

मोह माया से परे उसकी छाया के तले
जो तपता दिन रात उसको रोशनी मिले ।
केदार विश्वनाथ मुझको जाना अमरनाथ
जहां मिलता तेरा साथ भोलेनाथ जी ॥

रख दे सर पे जिसके हाथ
दुनिया चलती उसके साथ
ऐसा खेल है खिलाता मेरा नाथ जी ॥

ये दुनिया है भिखारी पैसे की मारी मारी
मेरा तू ही है सहारा मेरे भोलेनाथ जी ।
मेरा हाथ ले तू थाम बाबा ले जा अपने धाम
इस दुनिया से बचा ले मुझको शंभूनाथ जी ॥

मोह माया से परे तेरी छाया के तले
जो तपता दिन रात उसको रोशनी मिले ।
केदार विश्वनाथ मुझको जाना अमरनाथ
जहां मिलता तेरा साथ भोलेनाथ जी ॥

रख दे सर पे जिसके हाथ
दुनिया चलती उसके साथ
ऐसा खेल है खिलाता मेरा नाथ जी ॥

तेरा रूप है प्रचण्ड तू आरंभ तू ही अंत
तू ही सृष्टि का रचियता मेरे भोलेनाथ जी ।
में खुद हूं खण्ड खण्ड फिर कैसा है घमंड
मुझे तुझमें है समाना मेरे भोलेनाथ ज़ी ॥

मोह माया से परे तेरी छाया के तले
जो तपता दिन रात उसको रोशनी मिले ।
केदार विश्वनाथ मुझको जाना अमरनाथ
जहां मिलता तेरा साथ भोलेनाथ जी ॥

रख दे सर पे जिसके हाथ
दुनिया चलती उसके साथ
ऐसा खेल है खिलाता मेरा नाथ जी ॥

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